कारगिल: जब रॉ ने टैप किया जनरल मुशर्रफ़ का फ़ोन – BBC News हिंदी

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परवेज़ मुशर्रफ़

  • रेहान फ़ज़ल
  • बीबीसी संवाददाता
23 जुलाई 2019

21 जुलाई 2021 को अपडेट किया गया

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इन दिनों भारत समेत दुनिया भर में साइबर जासूसी को लेकर विवाद फिर ज़ोरों पर है. इसराइल की कंपनी एनएसओ पर स्पाईवेयर पेगासस के ज़रिए हज़ारों लोगों को जासूसी का निशाना बनाने का आरोप है. एक बार फिर पढ़िए वो किस्सा जब रॉ ने कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान के जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ का फ़ोन टैप किया था. बीबीसी पर यह लेख सबसे पहले 23 जुलाई 2019 को प्रकाशित हुआ था.

प्रेजेंटेशनल ग्रे लाइन

26 मई 1999 को रात साढ़े नौ बजे भारत के थलसेनाध्यक्ष जनरल वेदप्रकाश मलिक के सेक्योर इंटरनल एक्सचेंज फ़ोन की घंटी बजी. दूसरे छोर पर भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के सचिव अरविंद दवे थे. उन्होंने जनरल मलिक को बताया कि उनके लोगों ने पाकिस्तान के दो चोटी के जनरलों के बीच एक बातचीत को रिकार्ड किया है.

उनमें से एक जनरल बीजिंग से बातचीत में शामिल था. फिर उन्होंने उस बातचीत के अंश पढ़ कर जनरल मलिक को सुनाए और कहा कि इसमें छिपी जानकारी हमारे लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.

कारगिल वॉर के दौरान थलसेना अध्यक्ष रहे जनरल वेद प्रकाश मलिक से बात करते हुए रेहान फ़ज़ल
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कारगिल वॉर के दौरान थलसेना अध्यक्ष रहे जनरल वेद प्रकाश मलिक से बात करते हुए रेहान फ़ज़ल

जनरल मलिक ने उस फोन-कॉल को याद करते हुए बीबीसी को बताया, ‘दरअसल दवे ये फ़ोन डायरेक्टर जनरल मिलिट्री इंटेलिजेंस को करना चाहते थे, लेकिन उनके सचिव ने ये फ़ोन ग़ल्ती से मुझे मिला दिया. जब उन्हें पता चला कि डीजीएमआई की जगह मैं फ़ोन पर हूँ तो वो बहुत शर्मिंदा हुए. मैंने उनसे कहा कि वो इस फ़ोन बातचीत की ट्राँस- स्क्रिप्ट तुरंत मुझे भेजें.’

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