ओलंपिक खेलों का वो पक्ष, जिनमें स्कैंडल, मारपीट और प्रतिबंध हैं – BBC News हिंदी

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ओलंपिक

  • रेहान फ़ज़ल
  • बीबीसी संवाददाता

26 मिनट पहले

इमेज स्रोत, Getty Images

यूँ तो आधुनिक ओलंपिक खेल हैरतअंगेज़ खेल कारनामों के गवाह रहे हैं, लेकिन साथ ही इन ओलंपिक खेलों में धोखाधड़ी, स्कैंडल्स, प्रतिबंधित दवाओं का सेवन, राजनीतिक विरोध और हिंसा का भी बोलबाला रहा है.

वर्ष 1886 में एथेंस में हुए पहले ओलंपिक खेलों में सिर्फ़ पुरुषों ने भाग लिया था. इनमें से अधिक्तर ग्रीक थे या उन दिनों ग्रीस की यात्रा पर आए हुए थे.

डेविड गोल्डब्लेट अपनी किताब ‘द गेम्स’ में लिखते हैं, “1900 के पेरिस खेल मध्य मई से लेकर अक्तूबर के अंत तक यानी साढ़े तीन महीने चले थे. इन खेलों में न तो कोई उद्घाटन समारोह और न ही समापन समारोह हुआ था. और तो और विजेताओं को कोई पदक भी नहीं दिए गए थे. तैराकी की स्पर्धा सीन नदी के गंदे पानी में कराई गई थी.”

अगले कुछ ओलंपिक खेल भी पूरी तरह से व्यवस्थित नहीं थे, जो कई महीनों तक चलते थे. खेलों के कोई निश्चित नियम नहीं थे और इस बात पर बहस होती थी कि एथलीटों को रविवार को दौड़ना चाहिए या नहीं और खेलों में उनके भाग लेने के लिए उन्हें पैसा मिलना चाहिए या नहीं.

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