बीएसपी का राजनीतिक वनवास क्या ब्राह्मणों को साथ लेकर ख़त्म होगा? – BBC News हिंदी

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मायावती

  • समीरात्मज मिश्र
  • बीबीसी हिंदी के लिए

10 मिनट पहले

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साल 2007 में बहुजन समाज पार्टी ने सर्व समाज का नारा देते हुए जब ब्राह्मण समुदाय को अपनी ओर जोड़ने का अभियान चलाया तो इस राजनीतिक समीकरण की सफलता पर ब्राह्मणों को भी भरोसा नहीं हुआ. लेकिन यह समीकरण इस क़दर सफल रहा कि बहुजन समाज पार्टी की राज्य में न सिर्फ़ पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनी बल्कि राजनीतिक भाषा में यह प्रयोग “सोशल इंजीनियरिंग” के नाम से मशहूर हो गया.

क़रीब 14 साल बाद बीएसपी नेता मायावती ने एक बार फिर सोशल इंजीनियरिंग के इस फ़ॉर्मूले को आज़माने की कोशिश की है और साल 2022 के विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत ही ब्राह्मण सम्मेलन के ज़रिए की है. दो दिन पहले उन्होंने एलान किया कि 23 जुलाई को अयोध्या में उनकी पार्टी इसकी शुरुआत करेगी और आने वाले दिनों में राज्य के सभी 18 मंडलों और उसके बाद सभी ज़िलों में ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.

ब्राह्मणों को पार्टी से जोड़ने और ब्राह्मण सम्मेलन करने की ज़िम्मेदारी बीएसपी महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को दी गई है.

ब्राह्मण सम्मेलन तो ठीक है, लेकिन इसकी शुरुआत अयोध्या से ही क्यों हो रही है, यह सवाल भी काफ़ी अहम है. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नकुल दुबे इसकी वजह बताते हैं, “वजह कोई ख़ास नहीं है. कहीं न कहीं से शुरुआत होनी ही थी. मर्यादा पुरुषोत्तम सभी के हैं. इसलिए सोचा गया कि क्यों न उन्हीं की नगरी से इसकी शुरुआत की जाए और ईश्वर की आराधना करके कुछ अच्छा काम किया जाए. अब यहीं से भगवान राम का आशीर्वाद लेकर अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा छोड़ा जाएगा.”

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